कोरोना मृत्यु दर कम लेकिन शरीर को नुकसान अधिक,
बीमारियों के इस दौर में अधिक कारगर है पंचकर्म विधि
जैसा कि हम देख रहे हैं कोविड-19 का विस्तार कम नहीं हो रहा है। लोग इस महामारी से डरे हुए हैं। हालांकि इस बीमारी में मृत्यु दर कम है, लेकिन शरीर को होने वाले नुकसान बहुत अधिक हैं। जिन्हें कोविड-19 हो चुका है, वह कई तरह की व्याधियों एवं शरीर पर होने वाले दुष्प्रभावों का सामना कर रहे हैं या अन्य बीमारियों की रिस्क पर आ गए हैं। कोरोना से लड़कर जीत चुके मरीजों में भी स्वास्थ्य संबंधी विकार जैसे निमोनिया, लिवर संबंधी समस्याएं, हार्ट संबंधी समस्याएं, किडनी संबंधी समस्याएं आदि देखी गई हैं।
सामान्य तौर पर माना जाता है कि हमारा शरीर सेकेंडरी इनफेक्शंस यानी बीमारियों के प्रभाव को अपने स्तर पर ठीक करने की कोशिश करता है। लेकिन कई बार रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने से रोगियों को इस प्रभाव के अधिक चपेट में आना पड़ता है, ऐसे में व्यक्ति का शरीर नई नई बीमारियों के लिए अधिक घातक स्थिति में आ सकता है। आयुर्वेद की पंचकर्म थेरेपी इन परिस्थितियों में काफी कारगर साबित हो सकती है। इस थेरेपी से डिटॉक्सिफिकेशन यानी शरीर की शुद्धि पर ध्यान दिया जाता है। शरीर की आंतरिक शुद्धि से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। इस थेरेपी में रसायन थेरेपी, योग, प्राणायाम आदि शामिल हैं। शरीर शोधन के बाद रसायन थेरेपी से शरीर में अधिक शक्ति आती है, क्योंकि शोधन से सारे टॉक्सिंस निकल जाते हैं और रसायन शरीर की धातुओं को टिशूज को नई ऊर्जा प्रदान कर देता है।
आयुर्वेद पद्धतियों के विभिन्न प्रकार के रसायन जैसे च्यवनप्राश, आमलकी रसायन आदि उपलब्ध होते हैं, जो स्फूर्ति, ताकत, बल और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देते हैं। हालांकि इनके सेवन करने का भी एक तरीका होता है और किसी भी प्रकार के रसायन के सेवन से पहले हमें विशेषज्ञ का मार्गदर्शन लेना चाहिए।
कोरोना वायरस का सबसे अधिक प्रभाव हमारे फेफड़ों पर होता है। वायरस खत्म होने के बाद भी यानी बीमारी से निजात पाने पर भी फेफड़ों में कमजोरी बनी रहती है। इसकी वजह से स्वास्थ्य संबंधी अनेक विकार उत्पन्न होने लगते हैं। देखा जा रहा है कि इस प्रकार के मरीजों को निमोनिया, सांस लेने में तकलीफ, श्वांस कोशिकाओं में ऑक्सीजन की जगह पर पस या पानी भर जाना, शरीर में ऑक्सीजन का सही प्रकार से वितरण नहीं हो पाना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति में योग व प्राणायाम करना निश्चित तौर पर लाभदायक होता है।
आयुर्वेद के सिद्धांतों, रसायन थेरेपी आदि मंदसौर आयुर्वैदिक हॉस्पिटल में चिकित्सकीय देखरेख में किए जाते हैं। कोविड-19 ठीक हो चुके या ऐसे व्यक्ति जो रोगी नहीं भी है, लेकिन जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, इन पद्धतियों का लाभ लेकर पंचकर्म चिकित्सा के द्वारा अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं और सामान्य मरीज भी यदि पंचकर्म पति अपनाएं तो उसका शरीर और ऊर्जावान और अधिक मजबूत बन सकता है।
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डॉ. रत्नप्रवा मिश्रा, मेडिकल डायरेक्टर, मन्दसौर इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एजुकेशन एंड रिसर्च |


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