जोकचंद के भाषण के बीच जोक"बन गया राकेश पाटीदार ,
कमज़ोर प्रत्याक्षी की छवि ने जकड़ा
मन्दसौर। एक चुनावी वीडियो के वायरल होते ही कांग्रेस प्रत्याक्षी राकेश पाटीदार की सोशल मीडिया पे भारी फजीहत हुई । दरअसल हुआ यूँ कि क्षेत्र के कद्दावर कांग्रेस नेता विधानसभा क्षेत्र में सुवासरा विधान सभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याक्षी राकेश पाटीदार के समर्थन में सभा को संबोधित कर रहे थे । समीप ही खड़े राकेश पाटीदार "बेवड़ा स्टाईल"में ऊँघने लगे तभी झटके से वे सचेत हुए । बस इन्ही पलो का वीडियो चित्रण सभा मे उपस्थित किसी श्रोता ने कर लिया और वीडियो देखते ही देखते ही वायरल हो गया । भाजपा को बैठे बिठाए मज़ेदार मसाला हाथ लग गया और उनकी सोशियल मीडिया सेना ने "दारू कुट्टया" "बेवड़ा" और ऊंघता प्रत्याक्षी जैसे संबोधनों से और तरह तरह के जोक बनाकर खूब मजे लिए ।
उधर कांग्रेस प्रत्याक्षी के पक्ष से भी सफाई दस्ता सक्रिय हुआ और पाटीदार की "बेवड़ा अदा" को अत्यधिक थकान करार दिया गया ।
खैर यह तो रही कांग्रेस भाजपा की नोंक झोंक और चुनावी जंग की बाते लेकिन इस पूरे मामले में सही मायने में देखा जाए तो राकेश पाटीदार की एक कमज़ोर प्रत्याक्षी की छवि निर्मित हुई है । उन्ही की पार्टी के उम्रदराज नेताओ को यदि देखे जैसे दिग्विजय सिंह या क्षेत्र के ही दोनों पूर्व मंत्री नाहटा और सोजतिया ने भी चुनाव लड़ा और वाहनों से लेकर पैदल पैदल कई किलोमीटर की यात्राएं जनसंपर्क दिन रात किया लेकिन इस प्रकार अपने शरीर को कभी नींद या थकान के आगोश में जाने नही दिया । इसी प्रकार भाजपा के कैलाश चावला जैसे भी कई नेता है जिन्होंने चुनावी दंगल में मन और शरीर को मजबूती से संभाले रखा ।
माना कि मानव शरीर की अपनी सीमा होती है लेकिन चुनावी समर में मजबूत मन शरीर को साधे रखता है । मन का कमज़ोर होना जीवन मे कई प्रकार की बुरी आदतों को भी विकसित करता है । मसलन ढीला मन चरित्रहीनता की ओर प्रवृत्त करता है । असंयमित मन ईमान पे भी कायम नही रहने देता वो मुसीबत से मुकाबला करने की बजाए बेईमानी की आसान राह पकड़ लेता है । कमज़ोर मन अय्याश प्रवृत्तियों और जुआ शराब और शबाब जैसी सामाजिक बुराई का आसक्त बना देता है ।
मन के हारे हार है मन के जीते जीत
राकेश पाटीदार को अपने प्रतिद्वंदी भाजपा के प्रत्याक्षी हरदीप सिंह डंग और खुद की पार्टी के जिला अध्यक्ष नवकृष्ण पाटिल से सीखना चाहिए कि कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी के बाद जबकि फेफड़े सांस लेते ही नाम पूछते है ,में भी जनता के बीच मजबूत मन के सहारे बिना धकड़िया खाये मजबूती से चुनावी किला लड़ा रहे है ।
समझदार मतदाता हमेशा मजबूत मन और स्वास्थ्य वाले प्रत्याक्षी को पसंद करता है क्योंकि नेता की ऊर्जा जनता और कार्यकार्ता को हमेशा सक्रिय बनाके रखती है ।


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