मतदाता निष्पक्ष चुनाव और अच्छे उम्मीदवार के लिए ईमान की कमाई करता है खर्च
(राजेश पाठक , मंदसौर )
भारतीय परिवेश में जहां मतदाता को रुपये और मुफ्त की योजनाओं का प्रलोभन देकर चुनाव लड़ा जाता है वही प्रत्याक्षी की हरकतों और छिछोरेपन को भी भी चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है | मतदाता अधिकाँशतः चालित स्थिति परिस्थिति से प्रभावित होता है | वो कभी कभी असमंजस्य में भी होता है कभी स्पष्ट भी होता है | हमारे यहाँ कभी कभी चुनावी नतीजे भी बहुत उलटफेर वाले होते है | कई वर्षो से हम देख रहे है कि लोकसभा और विधान सभा के चुनावों में 100 प्रतिशत जीत की आश्वस्ति वाले उम्मीदवार भी हार जाते है | यदि उनकी हार का विश्लेषण करे तो तात्कालिक परिस्थियों में उनके द्वारा किये गए व्यवहार , बोली और हावभाव विरोधी खेमे को उसे पराजित करने का हथियार मुहैय्या करवा देती है | किसी लहर में कभी कभी ऐसे लोगो को भी मतदाता आसमान पे बैठा देता है जिनको ज़मीन पे भी ढंग से खडा होने में दिक्कत होती है | चुनाव में एक प्रत्याक्षी की हालत विवाह योग्य उस सभ्य कुँवारी लड़की के जैसी होती है जिसको लडके वाले देखने आते है | विवाह योग्य कन्या लडके के परिवार के सामने आहिस्ता चलती है , आहिस्ता बोलती है , सर से पाँव तक का लिबास मन मोहक लेकिन सभ्यता लिए होता है | इसी प्रकार चुनावी प्रत्याक्षी को भी अपने आचरण को रखना चाहिए या आदत में डाल लेना चाहिए | इसके लिए बहुत ही संयम और धेर्य की आवश्यकता होती है | गंभीरता मतदाता को आकर्षित करती है | मतदाता को गंभीरता लिया हुआ प्रत्याक्षी अच्छा लगता है तथा यह विशवास उनके मन में स्थान बनाता है कि हमारा भविष्य इस प्रत्याक्षी के हाथो सुरक्षित रहेगा | आरोप प्रत्यारोप चुनावी दंगल में आम बात है | अपने विरोधी का चरित्रहनन करना एक बेहतरीन चुनावी हथियार है | देश में बिहार जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव है तथा मध्यप्रदेश में उप चुनाव का संग्राम जारी है | मतदाता को उसी उम्मीदवार को अपना मत देना चाहिए जो भविष्य के लिए उपयुक्त हो | वर्त्तमान में पार्टिया मतदाता को भ्रमित करके रखती है | राजनितिक पार्टियों ने पंजीबद्ध अपराधियों और कथित सफेदपोशो को भी अपना उम्मीदवार बनाया है लेकिन अगर मतदाता जागरूक और समझदार होगा तो राजनितिक दलों के शिकंजे से मुक्त होकर एक बढ़िया उम्मीदवार को चुन सकता है | मध्यप्रदेश की अगर बात की जाए तो अधिकाँश जगहों पर ऐसे प्रत्याक्षी है जो पैसो के बल पर चुनाव लड़ रहे है उनके पास वो पैसा कहाँ से आया ? उसका स्त्रोत क्या है ? इन सभी बातो पर विचार करना चाहिए | अब हम यदि मंदसौर जिले की सुवासरा विधान सभा उप चुनाव की बात करे तो यह जिला अफीम उत्पादक जिला है जिसमे किसान की भूमिका उत्पादक की है लेकिन इसी के साथ तस्कर लॉबी भी चुनावों के परिणाम पर असर डालती है तस्करी में लिप्त अपराधी पैसा खर्च करके जनप्रतिधियो को उपकृत करके अपना फ़ायदा भविष्य में लेते है | मतदाता को ऐसे प्रत्याक्षियो पर निगाह रखना चाहिए जिनका सम्बन्ध तस्करो से हो क्युकि देश की नौजवान पीढी को खोखला करने वाले ये तस्कर कभी भी बड़े उद्योग धंधो के हिमायती नहीं रहे है क्योकि क्षेत्र का बेरोजगार युवा रोज़गार के चक्क्कर में इनका मालवाहक बन जाता है | मादक पदार्थ अधिनियम के अंतर्गत देश के विभिन्न जेलों में बंद कैदियों का सर्वे यदि आप करेंगे तो पायेंगे कि अधिकाँश युवा है और बेरोजगारी के चलते या तो वे नशे के आदि हो गए या बड़े सफेदपोश तस्करों के मालवाहक बनाकर जेलों में सड़ रहे है | मतदाता को उम्मीदवार का चुनाव बहुत बारीकी से करना होगा | उम्मीदवार के चाल , चरित्र को जानना होगा | पार्टी ,पंथ ,जाति , सम्प्रदाय की भावना से ऊपर उठकर सर्वहितकारी उम्मीदवार को चुनना होगा | मतदाता को खुद के पैसो का मूल्य का मान रखना होगा क्युकि सभी चुनाव मतदाता के पैसो से ही सम्पन्नं होता है | मतदाता निष्पक्ष चुनाव और अच्छे उम्मीदवार के लिए ईमान की कमाई टेक्स के रूप में खर्च करता है |
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