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| स्वर्गीय केशवप्रकाश विद्यार्थी , स्वतंत्रता संग्राम सेनानी |
जिनका रोम-रोम राष्ट्र की मिट्टी से सना था। स्वतन्त्रता आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी से लेकर स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात भी राष्ट्र को ही अपना धर्म व कर्म समझा श्रद्धेय केशवप्रकाशजी विद्यार्थी ने। भारतीय संस्कृति के वे सच्चे संवाहक थे।
यथा नाम तथा गुण को चरितार्थ करते हुए केशवप्रकाशजी ने अपने लेखन व पत्रकारिता के क्षेत्र में सत्य धर्म की रक्षा के लिये भगवान ‘केशव’ की ही तरह सुदर्शन चक्र चलाने में जरा भी नहीं झिझके वहीं दूसरी ओर अपनी साहित्यिक प्रतिभा से ‘सरल गीता‘ व अन्य श्रेष्ठ रचनाओं के माध्यम से ज्ञान का ‘प्रकाश‘ फैलाया।
विद्यार्थीजी एक सच्चे राष्ट्रभक्त, स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी, साहित्यकार, पत्रकार व एक श्रेष्ठ कर्मनिष्ठ व्यक्तित्व के पुरोधा थे।
निर्भीक, निडर, अडिग, अटल, दृढ़ संकल्पवान व्यक्तित्व के धनी ‘विद्यार्थीजी‘ को सत्ता या अन्य किसी भी प्रकार का आकर्षण किंचित मात्र भी अपने मोहपाश में बांध नहीं पाया। समय आने पर उसे धता बताने में भी देर नहीं की। वे अपने आप को ‘कलम का मजूर‘ मानते थे। उनकी सच्चाई ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। अपनी कलम की धार को उन्होंने कभी कुंद नहीं होने दिया। आदर्श व निष्ठावान पत्रकारिता के वे ‘प्रकाश’ पुंज हैं।
हिंदी साहित्य में ‘सरल गीता’ के रूप में ‘विद्यार्थीजी’ का एक अद्भुत व अनुपम योगदान है। इसमें श्रीमद् भगवद् गीता के संस्कृत श्लोकों का सरल हिंदी भाषा में पदानुवाद किया गया है। यह उनकी विलक्षण प्रतिभा का ही प्रमाण है। इस निमित्त हिंदी साहित्य जगत में विद्यार्थीजी का नाम सदैव सम्मानित रहेगा।
मन्दसौर व मन्दसौर जिला ही नहीं वरन पूरी मालव माटी के इस महामानव से हम सब मानव धर्म व राष्ट्र धर्म का पाठ सीखते रहेंगे। ऐसे ही व्यक्तित्व सच्चे नायक होते हैं।
जन्म शताब्दी तिथि के अवसर पर शत-शत नमन ।
गोपालकृष्ण पंचारिया
संस्थापक,
अनुराग संस्था, ब्रह्म परिषद्
9827363040

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