मन्दसौर। काफी लम्बे अर्से बाद नगर में खानपुरा के नागारूण्डी स्थित प्राचीन श्री तीन छत्री बालाजी धाम में 25 जनवरी से 3 फरवरी 2020 तक 10 दिवसीय आयोजित भव्य 9 कुण्डीय श्री राम यज्ञ, हनुमन्त कथा आदि विविध धार्मिक आयोजनों के संबंध में इस भव्य आयोजन के प्रमुख प्रेरणाश्रोत एवं आशीर्वाददाता पूज्य सन्त श्री श्री 108 रामकिशोरदासजी महाराज ने कहा कि 1992 में मंदसौर में आगमन पर प्रारंभ में शिवना तट स्थित महादेव घाट पर निवास से लेकर बाद में श्री तीन छत्री बालाजी धाम पर स्थायी मुकाम, यहां रहकर बालाजी की साधना, तपस्या से पूर्व के मन्दिर और परिसर को विशाल भव्य रूप प्रदान कर आद्योपान्त वृतान्त बताते हुए वर्तमान में यज्ञ की आवश्यकता बताते हुए यज्ञ की संस्कृति महत्व और परम्परा अनादिकाल से रही है। अयोध्या के महाराजा दशरथ के कोई सन्तान नहीं होने से सन्तान प्राप्ति के लिये उन्होंने गुरू वशिष्ठ से परामर्श कर पुत्रेष्टी यज्ञ कराया था जिससे उनके यहां परम पुरूषार्थी, धर्मावलम्बी, कर्तव्यनिष्ठ चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी। पौराणिक काल के ऐसे और भी कई उदाहरण जब तत्कालीन नरेशों ने प्रजा के हित में प्रजा की सुख सुविधा के लिये यहां प्रमुख रूप से यज्ञ का सहारा लिया था। अकाल पड़ने पर पर्याप्त बारिश के लिये भी यज्ञ से बरसात हुई थी। हिन्दू संस्कृति में यज्ञ को परम् धर्म परम् कर्तव्य माना गया है। धर्म और कर्तव्य के प्रति निष्ठा-सजकता के लिये यज्ञ की परम्परा जारी रहना अनिवार्य है और इसी उद्देश्य को लेकर यज्ञ किया जा रहा है। हमारी भावी पीढ़ी को संस्कारित करने में भी यज्ञ का योगदान महत्वूर्ण सिद्ध होगा।
यज्ञ को आपने भगवान का स्वरूप बताते हुए यज्ञ नारायण के रूप में भगवान का साक्षात्कार कराने मंे संतों के मार्गदर्शन को प्रमुख बताते हुए आपने कहा कि 3 फरवरी को आयोजित सन्त सम्मेलन में स्थानीय संतों के अतिरिक्त प्रयागराज-वृन्दावन आदि देश के विभिन्न भागों, प्रांतों से प्रसिद्ध विद्धान सन्तों को आमंत्रित किया गया है। आपने कहा कि धर्मस्थल राजनीति को नहीं, धर्मनीति को स्थापित प्रसारित, प्रचारित करने का स्थान होता है, इसलिये धार्मिक आयोजनों में और जहां विशेष रूप संतों के सानिध्य में उनके मार्गदर्शन में आयोजन होता है उसमें सभी का समान रूप से अधिकार होता है। सन्त की दृष्टि में कोई छोटा-बड़ा विशेष नहीं सभी समान होते है। चाहे राजनेता हो अथवा आम नागरिक सभी समान रूप से धर्मलाभ, संतों से आशीर्वाद से सकते हैं।
9 कुण्डीय यज्ञ में निरन्तर 9 दिन तक प्रत्येक कुण्ड पर बैठने के लिये आयोजन समिति द्वारा दानराशी 51 हजार रू. निर्धारित की है परन्तु समयाभाव अथवा परिस्थितिवश जो लगातार 9 दिन तक भाग नहीं ले सके केवल 1 दिन के लिये भाग ले सके उसके लिये 5100 रू. रखी गई जिसका उपयोग उस दिन की भोजन व्यवस्था में दानदाता की ओर से लाभार्थी की हैसियत से किया जावेगा। 5 कुण्डों का पंजीयन हो चुका है। शेष कुण्डों पर जो भी बैठना चाहे आयोजन समिति से सम्पर्क कर सकता है। यज्ञ में भाग लेने के लिये मो.नं. 9414436551, 9229423707, 9425977691,8103440343, 9229671780, 9301910717, 8085233898, 9928120065 पर सम्पर्क कर अपना पंजीयन करवा सकते है।
पूज्य रामकिशोरजी ने अपने को श्रीमद् जगद्गुरू रामानन्दजी सम्प्रदाय से होना बताया जिसकी चार पीठ चित्रकूट, काशी, हरिद्वार व अयोध्या में है।
संत श्री ने खानपुरा के 25-30 युवकों सहित उन समस्त भक्तों की सराहना की जो नित्य नियम से बालाजी की सेवा और धर्म कार्यों में सेवारत है।
स्वामीजी ने बताया यज्ञ प्रारंभ से पूर्व यज्ञाचार्यों का धार्मिक विधी विधान भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर पर होगा तत्पश्चात् सभी यज्ञाचार्य गणपति चौक से आयोजित कलश शोभायात्रा में सम्मिलित होंगे।
पूज्य संत श्री एवं तीन छत्री बालाजी आयोजन समिति ने समस्त नगरवासियों तथा समस्त क्षेत्रवासियों से इस भव्य आयोजन में अधिक से अधिक भाग लेकर तन-मन-धन से सहयोग कर पुण्य लाभ लेने का आव्हान अनुरोध किया है।

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