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शहर के पुराने बाजारों की रौनक लौटाए तथा कॉलोनियों को बाजार बनने से रोके - चन्द्रे mandsaur

शहर के पुराने बाजारों की रौनक लौटाए तथा कॉलोनियों को बाजार बनने से रोके - चन्द्रे 

मन्दसौर। मंदसौर एक प्राचीन नगर है तथा इसका  ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्त्व बड़ा ही गौरवशाली रहा है। पशुपतिनाथ मंदिर के कारण भारत के कई क्षेत्रों में इसकी ख्याति धार्मिक नगरी के रूप में भी है किंतु औद्योगिक तथा व्यवसाय की दृष्टि से यह नगर आज भी अन्य नगरों की तुलना में बहुत पिछड़ा हुआ है। 


उक्त विचार व्यक्त करते हुए शिक्षाविद रमेशचन्द्र चन्द्रे ने कहा कि 1947 के बाद से ही राजनीतिक दृष्टि से मंदसौर जिला बहुत ही सम्पन्न रहा और प्रारंभ से ही इस जिले में मंत्री तथा  मुख्यमंत्री रहे अर्थात किसी न किसी रूप में प्रदेश एवं देश का नेतृत्व मंदसौर जिले ने प्रदान किया किंतु दुर्भाग्य कहे अथवा नेताओं की निष्क्रियता वे इतने वर्षों में मंदसौर जिले में कोई बड़े उद्योग स्थापित नहीं कर पाए और ना ही कृषि उपज मंडी को छोड़कर कोई बड़ी व्यवसायिक पहचान बना पाए एवं जो शासकीय उद्योग प्रारंभ भी किए गए वह भी कुछ समय बाद बंद हो गए।
श्री चन्द्रे ने आगे कहा की मंदसौर नगर में मकानों के जंगल तो खड़े हो रहे हैं किंतु नगर के व्यवसायिक विकास को लेकर कोई मास्टर प्लान नहीं बनाया जाता है, पुराने बाजारों की रौनक समाप्त होती जा रही है तथा भू माफिया पूरी प्लानिंग के साथ बाजार को विकृत करने में लगे हुए हैं और यहां तक की कालोनियों को भी बाजार का रूप प्रदान किया जा रहा है इसलिए जो पुराने व्यापारी हैं वे बर्बाद होते जा रहे हैं। 
श्री चंद्रे ने राजनीतिक नेतृत्व एवं प्रशासन से मांग की है कि जनकुपुरा, धानमंडी, सदर बाजार, सराफा तथा कालाखेत, खानपुरा से लेकर मंडी गेट तक के व्यापार-व्यवसाय को पुनः जागृत करने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार होना चाहिए आवश्यकतानुसार वहां की सड़कों को चौड़ी करने ट्रकों से सामान खाली करने की जगह एवं पार्किंग की समुचित व्यवस्था के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। इस दिशा में फुटकर एवं थोक व्यापारी एसोसिएशन तथा होटल हलवाई व्यवसाय संघ को प्रयास करके और सभी राजनीतिक दलों को नगर पालिका के चुनाव में अपने घोषणा पत्र में उक्त योजना को प्रमुखता के साथ रखना चाहिए तथा उसे पूर्ण ईमानदारी से पूरा करने की आवश्यकता है।

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