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उम्मीदवार का चयन कैसे हो ?-How to choose a candidate?

 उम्मीदवार का चयन कैसे हो ?

लेखक - रमेशचन्द्र चन्द्रे

How to choose a candidate?

एक समय था जब योग्यता के आधार पर उम्मीदवार का चयन होता था और किसी भी राजनीतिक संगठन में मंत्री, विधायक और जिला संगठन हमेशा योग्य व्यक्तियों की तलाश में रहता था और यह लोग अपनी द्वितीय पंक्ति के कार्यकर्ताओं को तराशकर उनकी योग्यताओं का विस्तार करके उन्हें समाज का नेतृत्व करने के लिए दायित्व दिया करते थे किंतु यह पैटर्न बदलता जा रहा है अब जी हुजूरी में एक्सपर्ट लोग, योग्य व्यक्तियों को लूप लाइन पर डालकर खुद मेन लाइन पर आ जाते हैं और यहीं से शुरू होती है अयोग्य व्यक्तियों की राजनीति में एंट्री। 
कई बार विधायक, सांसद एवं अन्य नेता द्वितीय पंक्तियों के नेताओं को तैयार होने ही नहीं देते हैं उनकी कोशिश होती है, सिर्फ बूढ़े होने तक हम राजनीति में बने रहे और धीरे-धीरे ऐसे राजनेताओं की उदारता खत्म होती जाती है और वह स्वार्थ की राजनीति करते हैं। किंतु राजनीति हमेशा देश और समाज के लिए की जानी चाहिए यदि इसका अवमूल्यन होता है तो राजनेताओं के प्रति जनता का दृष्टिकोण अच्छा नहीं होता है इसलिए उम्मीदवार का चयन करते समय उसकी योग्यता, समर्पण,ं समय दान तथा जनता के प्रति सद्भावना के भाव एवं प्रत्येक व्यक्ति के लिए शासन प्रशासन में आने वाली कठिनाइयों को हल करने में जो तत्पर हो ऐसे कार्यकर्ता का चयन हमेशा उम्मीदवार के रूप में संबंधित संगठन, राजनेता, विधायक, सांसद और अन्य पदों पर बैठे हुए लोगों को निष्पक्ष और निस्वार्थ भाव से करना चाहिए।
आज बायोडाटा की संस्कृति चल पड़ी है जो अत्यंत ही घातक है। वर्तमान में कतिपय उम्मीदवार अपने बायोडाटा फर्जी तरीके से खूबसूरत बना कर राजनेताओं के घर-घर जाकर अपनी योग्यता का बखान कर अथवा जी हुजूरी के लहजे में बात कर जो जाते आते हैं उन को प्रोत्साहित करने के बजाए उन्हें उनकी अंतरात्मा में झांक कर देखने की सलाह देना चाहिए और बताना चाहिए कि तुम्हारा जीवन स्वयं देखो तथा अपने चरित्र की जांच स्वयं करो तथा अपनी योग्यता का मूल्यांकन भी स्वयं करो उसके बाद हम इस दिशा में आप की सिफारिश आगे कर सकते हैं किंतु ऐसा नहीं होता है और राजनेता अपने इर्द-गिर्द सिर्फ मक्खन लगाने वाले जी हुजूरी करने वाले लोगों को लगाए रखते हैं और यही परिणाम होता है कि शासन और प्रशासन चलाने में ऐसे कार्यकर्ता अपूर्ण, अयोग्य, निष्क्रिय, भ्रष्ट, अन्याई तथा अपनी जेब भरने के उपक्रम में लगे रहते हैं जबकि राजनीति में बायोडाटा की संस्कृति पूर्णतया अनुचित है क्योंकि अपने कार्यकर्ता की कार्य क्षमताओं पर नजर रखना यह संगठन की जिम्मेदारी है।
राजनेताओं तथा राजनीतिक संगठनों से जुडी नेतृत्व करने वाली टीम को इस बात की सावधानी बरतना चाहिए और राजनीति समाज हित और देश हित के लिए होती है यह सिद्ध करना चाहिए अन्यथा यह देश और समाज आपकी गलती के लिए कभी आप को माफ नहीं करेगा और यदि समाज ने माफ कर भी दिया तो ईश्वर की दृष्टि इतनी कमजोर नहीं है कि वह आपको ना देखे।

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