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गुमटी माफिया सक्रीय ,! गरीबो की आड़ में दबंग वसूलते है ,सरकारी ज़मीनों का किराया? gumati mafia


पूर्व मंत्री नरेन्द्र नाहटा ने खोली सुशासन की पोल

 

मंदसौर | क्या आप सोच सकते है कि किसी नगर पालिका अध्यक्ष की ह्त्या सिर्फ गुमटीयो के चक्कर में हो सकती है ? जी  हां इसी घटना मंदसौर में घट चुकी है जब लोकप्रिय भाजपा के नगरपालिका अध्यक्ष स्व. प्रहलाद बंधवार की ह्त्या के पीछे गुमटी का विवाद भी  था | उनकी ह्त्या के प्रतिक्रया स्वरुप नगरपालिका प्रशासन ने उस समय शहर को गुमटी मुक्त कर दिया था | उसके बाद कांग्रेस सरकार आने के बाद कांग्रेस के नपाध्यक्ष बने हनीफ शेख के कार्यकाल में भी  गुमटीयों  पर कार्यवाही की गयी थी  जब विहिप नेता युवराज सिंह चौहान ह्त्या कांड में  आरोपियों पर जबरन गुमटीयो पर कब्जे के मामले सामने आये थे | वर्त्तमान में भाजपा के ही राम कोटवानी न्यायालय की अनुकम्पा से फिर से नपाध्यक्ष पद पर  काबिज है | उनके आते ही गुमटी माफिया फिर से सक्रीय होकर शहर की बेशकीमती ज़मीनों पर अपना साम्राज्य फैलाना शुरु कर दिया है |

इसी बात को लेकर कांग्रेस के कदावार नेता और पूर्व केबिनेट मंत्री नरेन्द्र  नाहटा ने बेबाकी से अपनी बात रखी है जो कि सोसिअल मीडिया पर बहस का विषय बन गयी है | श्री नाहटा ने बताया कि समाचार पत्रों की रिपोर्ट सही मानूं  तो मंदसौर शहर में फिर गुमटियां लगना  शुरू हो गई है।  यह बड़ा आसान काम है।  इसमें लोकप्रियता भी मिलती है। नेता गिरी स्थापित होती है । परन्तु आम  नागरिक की सुविधाओं की  कीमत पर होता है। लगवाना  आसान है, हटाना मुश्किल।कालाखेत स्टेडियम की हालत देख लीजिये l  वहां क्यों पट्टे दिए गए। जहां स्टेडियम बनाना था वहां क्या हो रहा है, सब देख रहे है।    दुःख इस बात का है वही नागरिक चुपचाप देखता रहता है जिसकी सुविधाओं की कीमत पर यह सब कुछ होता है। मै गरीब लोगों को सुविधा देने के खिलाफ नहीं हूँ।  उनके लिए स्थान चिन्हित कीजिये l  किसी ईमानदार  पारदर्शी व्यवस्था से उन्हें  जगह अलाट कीजिये  l  पर इसे बाहुबलियों के हाथ में मत सौंपियें।  इसे व्यापार मत बनाइये।  यह उन लोगो की जमीन नहीं है कि वे गरीब लोगो का शोषण कर कमाई करें।  इसे रोका जाना चाहिए। 

 

पिछली  सरकार के समय नियमों के विपरीत निर्माण करने वालों पर भी कार्यवाही हुई।  ऐसे निर्माण रोके गये।  अब समाचार पत्रों के अनुसार ऐसे सभी निर्माण  को अनुमति दे दी गयी है।  मै निर्माण करने वालों के खिलाफ नहीं हूँ।  उन्हें पता था कि नगरपालिका अपना हिसाब करके अनुमति  दे देगी।  उसी हिसाब से उनने जमीन खरीदी होगी।  यदि उन्हें पता होता कि इस तरह के अवैध निर्माण पर सख्ती होगी  तो वे शायद ऐसी जमीन ही नहीं खरीदते या उसी अनुसार रेट तय होता। अब जो अनुमति दी जा रही है वह निर्माण करने वालो के  प्रति सहानुभूति है या कोई और हिसाब किताब है ? क्या उस अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही होगी जिसका नियमों  का ज्ञान पहले कहता था  कि  गलत है और अब कहता है कि  सही है।  

   

 इसी तरह जब पिछली सरकार ने माफिया के खिलाफ अभियान चलाया तो कुछ राजनैतिक व्यक्तियों ने विरोध किया था। उनका स्वार्थ इन लोगों से जुड़ा था।  अब क्या हो रहा है।  सरकार भले ही बदल गयी हो  पुलिस तो वही है। जिन्हे पुलिस इतने लम्बे समय तक पकड़ नहीं पाई  पर वे ही सब लोग एक के बाद एक , आसानी से , सरकार बदलते ही , गिरफ्तार होते जा रहे है।  पुलिस की अपनी कहानी है।  कोई नागदा में मिल रहा है , कोई नेपाल में जुआ खेलते हुए पकड़ा जा रहा है कोई गुजरात के उसी गाँव में जहां पहले भी पुलिस कितनी ही बार छापा मार चुकी है।  अखबार लिख रहे है कि गिरफ्तारी की पुलिस की कहानी पर विश्वास नहीं आ रहा।  कहीं  यह वही दोस्ती तो नहीं जो पहले थी।किसी आश्वासन के तहत सरेंडर हुए या गिरफ्तार हुए।  यह डर इस लिए भी है कि इंदौर की ऐसी ही किसी घटना के लिए कल अखबार में छपा कि उस व्यक्ति के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। मतलब वह निर्दोष है।   अधिकारी और सरकार बदली होगी, पुलिस तो  वही है ।  तो क्या बगैर सबूत के कार्यवाही हो गई।  तो फिर उन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही कीजिये।  क्या ये तत्व  जैसे पहले  फलते फूलते रहे अब फिर वही होगा। मेरी चिंता मंदसौर है।  वीरेंद्र ठन्ना , अजय सोनी, प्रह्लाद बंधवार जी  जैसी घटनाएं दुबारा नहीं हो यह सबकी जवाबदारी है।   यदि मेरा डर  सही  है तो मंदसौर और मध्य प्रदेश की जनता के सिर पर फिर खतरा मंडरा रहा है।

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