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यशपाल सिंह सिसोदिया को मंत्री ना बनाए जाने के विरोध में धरना

क्या यह संकेत है प्रदेश में बागी विरुद्ध बागी जैसी नयी कहानी का


मंदसौर | भारतीय मजदूर मिस्त्री संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार कुमावत ने अपने समर्थको के साथ मंदसौर के आज़ाद चोक पर मंदसौर विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया को शिवराज सरकार के नवगठित मनरी मंडल में स्थान ना देने के विरोध में धरना दिया |

अधिकाँश मजदूर मिस्त्री संघ  की गतिविधियों से वास्ता रखने वाले राजकुमार कुमावत का इस तरह सरकार के प्रति रोष प्रकट करना स्वाभाविक है | मंदसौर विधान सभा से तीसरी बार विधायक चुने गए यशपाल सिंह सिसोदिया मंत्री मंडल में जगह पाने के जायज हकदार थे लेकिन कमल नाथ सरकार को गिराकर कांग्रेस से भाजपा में आये विधायको  को मंत्री मंडल में लेना भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज  सिंह चौहान की मजबूरी थी | इस बात को खुद विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया अच्छी तरह जानते है | फिर भी क्षेत्र की जनता और उनके समर्थको में निराशा का भाव पैदा हो गया है |

राकुमार कुमावत
राज कुमार कुमावत का कहना है कि मे  यशपाल जी के मंत्री ना बनाए
 जाने से बहुत दुखी और निराश हूँ ' मुझे उम्मीद है कि क्षेत्र के विकास के लिए अनुभवी  विधायक को 
मंत्री बनाए जाने की मांग पर शिवराज जी को पुनः मंथन करना चाहिए | 

राजकुमार कुमावत  जैसे सैकड़ो कार्यकर्ता और समर्थक यशपाल सिंह सिसोदिया को  मंत्रीमंडल में लिए जाने की आशा के साथ आश्वस्त थे | लेकिन हुआ कुछ उलटा ही | कार्यकर्ताओं और समर्थको ने सोसिअल मीडिया पर भी जमकर अपनी नाराज़गी  ज़ाहिर की है |

प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस छोड़ कर  भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके  समर्थक विधायक व  मंत्रियो   में से कईयों को  बगैर चुनाव जीते मंत्री बना दिया गया है | भाजपा इस वक्त अपनी सरकार को बचाने के लिए उपचुनाव किसी  भी हालत में जीतना चाहती है इसका नतीज़ा भविष्य की गर्त में छिपा है | फिल हाल जो असंतोष जो अभी दबे स्वर है उप चुनाव के बाद मुखर हो सकता है |

मंत्री  मंडल गठन में पार्टी के प्रति निष्ठा और वरिष्टता को  नज़रअंदाज़  करना इस बात को साबित करता है कि सौदेबाजी की प्रतिबद्धता निभाने में भारतीय जनता पार्टी ने अपने चाल चरित्र और संस्कार के बिलकुल विपरीत कार्य किया है |

 


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