व्यासपीठ पर विराजित परम पूज्य संत श्री दशरथ भाईजी के मुखारबिन्द से प्रभु राम के जन्म वृतान्त को सुनकर धर्मालुजन भाव विभोर हो गये। अवसर था दिनांक 3 जनवरी से संजय गांधी उघान में श्री सुयश रामायण मण्डल जनता काॅलोनी के द्वारा सात दिवसीय रामकथा का आयोजन का
राम जन्मोत्सव हेतु सुयश रामायण मण्डल ने कथा पाण्डल सुगन्धित पुष्पो से सजाया तथा रंग बिरंगे गुब्बारो बांध कर पुरे कथा पाण्डाल की विशेष सजावत की । रामकथा के तृतीय दिवस की कथा समापन पर जन्म प्रभु राम का जन्म वृतान्त आया तो धर्मालुजनों ने राम जयकारों लगाये तथा राम जन्मोत्सव वृतान्त पर अपनी प्रसन्ता की अभिवयक्ति हेतु जमकर नृत्य भी किया। सुयश रामायण से जुडे परिवारो ने राजा दशरथ व कौशल्या बनाकर रामजन्म की खुशिया मनायी।
श्री दशरथ भाईजी ने बताया कि राम जन्म के पूर्व भारत वर्ष की स्थिति का वृतान्त सुनाते हुये कहा कि प्रभु राम के जन्म के पूर्व राक्षसों का उत्पाद पुरे भारत वर्ष में बढ गया था। ऋषि मुनियों को उनके यज्ञ करते समय असुर कुल के लोग परेशान करते थे। बाह्रमणो ऋषियों का जीवन निर्वहन करना कठिन हो गया था। लंका पर रावण ने एकाधिकार जमा लिया था उसने अपने भाई कुबैर के द्वारा बनायी गयी लंका को हथियों लिया था तथा अपनी माता जो कि असुर कुल की थी उसके प्रभाव के कारण लंका में अनैतिक गतिविधियों को बढावा दिये ऐसे विकट समय में प्रभु राम का चेत्र नवरात्रि को अयोध्या के शासक राजा दशरथ के यहाॅ जन्म हुआ।राम के जन्म लेते ही पुरे अयोध्या में खुशीया मनायी गयी।
शिव पार्वती विवाह का प्रसंग का प्रसंग कराया श्रवण- दशरथ भाईजी ने राम कथा के तृतीय दिवस शिव पार्वति विवाह के प्रसंग को श्रवण कराया। सती के रूप में अपनी देह का त्याग करने वाली पार्वती ने कठिन तप तपस्या के बाद शिव को पाया। देवताओं के निवेदन पर भगवान शिव ने पुनः ग्रहस्थ जीवन में प्रवेश करतें हुए हिमालय राजा की पुत्री पार्वति से विवाह किया। दशरथ भाई जी ने विवाह प्रसंग को मनमोहक रूप से वृतान सुनाया।
शिव व राम एक दूसरे के पूरक है-
दशरथ भाई जी ने कहा कि शिव को राम प्रिय है और राम को शिव प्रिय है। महर्षि तुलसीदास ने राम व शिव को एक दूसरे का पूरक बताया है। भगवान शिव रामचरित मानस में पहले सती को व बाद में पार्वती कोे भगवान राम की कथा सुनाते है। ऐसा वृतान्त रामचरित मानस में तुलसीदास ने बताया है। शिव के द्रोही होकर आप राम की कृपा नही पा सकते यदि राम की कृपा पाना है तो शिव को प्रसन्न रखना ही होगा।
राम जन्म के कारण बताये दशरथ भाईजी ने-
राम जन्म के कारणो पर प्रकाश डालते हुऐ दशरथ भाईजी ने रामकथा में कहा कि सनातन धर्म के शास्त्रों में राम जन्म के चार कारध बतायें गये है। इसमें जय विजय द्वारा पाल को सनत कुमारों का श्राप नारद द्वारा विष्णु को दिया गया श्राप मनु श़त्रुपा का तप राम के पृथ्वी पर अवतरण के प्रमुख है। इन्ही चार कारणो के कारण प्रभु राम पृथ्वी पर जन्मे और पृथ्वी पर आकर मर्यादाओं की पुन स्थापना की।
इन्होने किया रामचरित मानस की पौथी की आरती-
तृतीय दिवस की रामकथा के समापन के अवसर पर पुष्पेन्द्र भावसार, नारूभाई इंजीनियर, भूपेन्द्र सोनी, विनय दुबेला, जयप्रकाश सोनी, धर्मवीर रत्नावत, सुरेश भावसार, सुरेन्द्र कुमावत ने राम चरित मानस की पौथी की आरती की।


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