विश्व हिन्दी दिवस 10 जनवरी पर विशेष कविता -![]() |
लाल बहादुर श्रीवास्तव |
हिन्दी भाषा हमारी राष्ट्र भाषा है
जन-जन कल्याण की समृद्ध भाषा है
हिन्दी आज भी उतनी सशक्त है
कल भी उतनी सशक्त रहेगी।
हिन्दी भाषा का किसी अन्य भाषा से न द्वेष है,
न संघर्ष है, न लड़ाई है
हिन्दी तो मेल मिलाप की सुन्दर भाषा है
भारत की सौंधी सौंधी मिट्टी से
कण-कण इसका प्रसूत है।
आचरण में, संस्कारों में, प्रयोग में
हिन्दी में जितनी मधुर मिठास है
शायद उतनी अन्य भाषा में नहीं हैं
एक शब्द के अनेक सुन्दर भव्य भाव
हिन्दी का शब्द-शब्द हृदयस्पर्शी है।
हिन्दी बोलचाल की भाषा
संग-संगजन-जन की सुविधा संचार भाषा है
हिन्दी तो रोम-रोम में सबके
ईश्वर की तरह समाने वाली
माँ की गोद में अटखेलियाँ करने वाली
बोलने, समझने वाली सहज समर्थ भाषा है।
हिन्दी के हम सब हिन्दी भाषी बेटेहम
सब पर यह दायित्व भाषा बोध हो
हिन्दी के सम्मान में पल-पल प्रतिपल समर्पित
बस माँ हिन्दी भाषा को प्रणाम हो।
- लाल बहादुर श्रीवास्तव
‘शल्प शिल्प’ एलआईजी ए-15,
जनता कॉलोनी, मंदसौर म.प्र.
मो.नं. 9425033960

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